!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्री कुमार धनंजय सुमन” !!
आध्यात्मिक चेतना मेरी लेखनी को मर्यादा, करुणा और आत्मप्रकाश देती है। भारतीय संस्कृति मुझे लोकमंगल की दिशा दिखाती है। मैं धर्म को विभाजन नहीं, मानवीय मूल्यों का प्रकाश मानता हूँ। यही भाव मेरी रचनाओं में सहज रूप से उतर आता है।
✍🏻 कुमार धनंजय सुमन
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“कल्प संवादकुंज – आस्था अध्यात्म विशेष”
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Kalp Samwad Kunj
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01/07/2026
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अध्यांत प्रभु
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!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती मुक्ता शर्मा” !!
स्वतंत्रता-पूर्व के साहित्य का मुख्य उद्देश्य सामान्य जनमानस के भीतर राष्ट्रीय चेतना का जागरण करना व सामाजिक कुरीतियों व विसंगतियों पर प्रहार करना था। ऐसे साथ-साथ प्रकृति प्रेम भी मुख्य विषय था।
स्वतंत्रता के पश्चात का अधिकांश साहित्य विभाजन के दंश विकास के सुझावों सामाजिक समरसता व भविष्य की नवीन संभावनाओं पर आधारित था।
✍🏻 मुक्ता शर्मा
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“कल्प संवादकुंज – संथाल हूल दिवस विशेष”
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Kalp Samwad Kunj
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24/06/2026
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संथाल हूल दिवस विशेष
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!! “कल्पकथा साप्ताहिक आमंत्रण : स्वरचित काव्य सृजन विशेष” !!
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Kalpkatha
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22/06/2026
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प्रतियोगिता
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📜 विशिष्ट आमंत्रण क्रमांक :– !! “कल्प/जून/२०२६/द” !! 📜
👨 विषय :- !! “स्वैच्छिक” !! 👨
⏰ समयावधि :- !! “दिनाँक २२/०६/२०२६, सोमवार प्रातः ०८.०० बजे से दिनाँक २६/०६/२०२६, शुक्रवार रात्रि १०.०० बजे तक” !! ⏰
📚 विधा :- !! “काव्य” !! 📚
📖 शब्द सीमा : !! न्यूनतम १० एवं अधिकतम २० पंक्तियाँ !! 🗒️
📢 भाषा :- !! “हिन्दी/संस्कृत (देवनागरी लिपि)” !! 📣
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!! “कल्प भेंटवार्ता : व्यक्तित्व परिचय : श्रीमती कल्याणी गुप्ता कृति” !!
प्रत्येक मस्तिष्क में तर्कशीलता और रचनात्मकता के दो अलग भाग होते हैं। बांया और दायां भाग इन्हें कंट्रोल करता है। यदि किसी व्यक्ति में तर्कशीलता और कल्पना इन दोनों का सामंजस्य हो जाता है तो दिमाग अधिक क्षमता से दोनों क्षेत्रों में कार्य करने लगता है।
✍🏻 कल्याणी गुप्ता “कृति”
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“कल्प संवादकुंज – सप्तऋषि – मेधा की महागाथा”
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Kalp Samwad Kunj
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18/06/2026
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सप्त ऋषि
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पिता का प्रेम, पसीना और हम…
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G Binani
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15/06/2026
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पिताजी बड़े दिल वाले थे यानि बड़ी से बड़ी गलती पर भी कुछ देर गुस्सा दिखाने के बाद माफ कर देते । वे अपनी तकलीफ तो बताते ही नहीं थे बल्कि हमारी हर जरूरत और तकलीफ को बहुत ही गम्भीरता से लेते थे । वे स्वयं अनुशासित रह हम सभी भाई बहनों को भी अनुशासन में रहना सीखा गये जिसके सुखद परिणाम का हम सभी भाई बहन आज आनन्द उठा रहे हैं ।
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!! “कल्पकथा साप्ताहिक आमंत्रण : पिताजी के साथ स्मृतियां विशेष” !!
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Kalpkatha
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15/06/2026
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प्रतियोगिता
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📜 विशिष्ट आमंत्रण क्रमांक :– !! “कल्प/जून/२०२६/स” !! 📜
👨 विषय :- !! “मेरे पिताजी” !! 👨
🫂 विषय विशेष :- पिताजी के साथ आपके जीवन के मधुर स्मृतियों पर आधारित प्रसंग। 🫂
⏰ समयावधि :- !! “दिनाँक १५/०६/२०२६, सोमवार प्रातः ०८.०० बजे से दिनाँक १९/०६/२०२६, शुक्रवार रात्रि १०.०० बजे तक” !! ⏰
📚 विधा :- !! “संस्मरण” !! 📚
📖 शब्द सीमा : !! न्यूनतम ५०० एवं अधिकतम १००० शब्द !! 🗒️
📢 भाषा :- !! “हिन्दी/संस्कृत (देवनागरी लिपि)” !! 📣
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बुंदेलखण्ड केसरी, अजेय कवि-यौद्धा: महाराज छत्रसाल बुंदेला
जिनके डर से दिगंत काँपे, जिनके रण में बाजा गाज,
बुंदेलों के शेर कहाए, वीर छत्रसाल महाराज।
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