हत्या का रहस्य
अस्वीकरण
(यह कहानी पूर्णतः काल्पनिक है। इसमें वर्णित पात्र, घटनाएँ, स्थान, अपराध, पुलिस कार्रवाई तथा संवाद साहित्यिक कल्पना पर आधारित हैं। किसी वास्तविक व्यक्ति, घटना अथवा स्थान से इसकी समानता मात्र संयोग मानी जाए।)
पहाड़ी किले पर सामना
रात का अंतिम पहर था। पहाड़ी के शिखर पर स्थित सदियों पुराना किला धुंध की सफेद चादर में आधा छिपा हुआ था। टूटी हुई प्राचीरों से टकराकर आती ठंडी हवा वातावरण में एक अजीब-सी बेचैनी भर रही थी।
पहाड़ी के नीचे पुलिस के वाहन रुक चुके थे। शिखर तक जाने वाला रास्ता इतना दुर्गम था कि वाहन ऊपर नहीं जा सकते थे। पुलिस दल पैदल ही किले तक पहुँचा था।
किले के विशाल खुले प्रांगण में पुलिस निरीक्षक विधि सावधानी से आगे बढ़ रही थी। उसकी आँखें लगातार चारों ओर घूम रही थीं।
पीछे उसके पाँच विश्वसनीय पुलिसकर्मी थे महेश, राघव, इमरान, देव और प्रकाश।
विधि ने धीमे स्वर में कहा
“सभी लोग सतर्क रहें। हमें नहीं पता कि शैतान कितने लोगों के साथ है।”
महेश ने अपनी स्थिति सँभालते हुए कहा
“जी, मैडम।”
अचानक टूटी हुई प्राचीर के पीछे से एक आवाज आई
“आखिर तुम यहाँ तक पहुँच ही गईं, विधि!”
सभी की निगाहें आवाज की दिशा में उठ गईं।
धुंध के बीच काले कपड़ों में एक लंबा व्यक्ति सामने आया।
वह था शैतान। क्षेत्र का दुर्दान्त अपराधी अफजल अली खान ऊर्फ शैतान
उसके पीछे सात हथियारबंद आदमी अलग-अलग दिशाओं में फैल गए।
शैतान मुस्कराया।
“तुम्हें लगा था कि मुझे पकड़ना इतना आसान होगा?”
विधि ने पिस्तौल निकालकर उसकी ओर तान दी।
“तुम्हें पकड़ना आसान नहीं है, शैतान। लेकिन तुम्हें बचने भी नहीं दिया जाएगा।”
शैतान ने गर्दन थोड़ी टेढ़ी की।
“पाँच लोगों की हत्या का आरोप लेकर तुम मेरे पीछे यहाँ तक चली आईं। आखिर तुम्हें उस परिवार से इतनी दिलचस्पी क्यों है?”
विधि की आँखों में एक क्षण के लिए कठोरता उभरी।
“क्योंकि कुछ अपराध केवल कानून के खिलाफ नहीं होते… वे इंसानियत के खिलाफ होते हैं।”
शैतान ने हाथ उठाया।
“इसे खत्म कर दो!”
अगले ही क्षण गोलियों की आवाज ने किले का सन्नाटा चीर दिया।
“सब लोग आड़ लो!”
विधि की आवाज गूँजी।
पुलिसकर्मी अलग-अलग पत्थर की संरचनाओं के पीछे अपनी स्थिति में आ गए।
राघव ने प्राचीर के पीछे से स्थिति देखी।
“मैडम! सामने दो, दाहिनी ओर तीन और ऊपर एक निशानेबाज!”
“महेश, दाहिना मोर्चा संभालो। देव और प्रकाश पीछे की दिशा सुरक्षित रखें। इमरान, मेरे साथ।”
“जी!”
अपराधियों की ओर से लगातार गोलीबारी होने लगी।
राघव ने जवाबी कार्रवाई करते हुए सामने वाले अपराधी की स्थिति पर निशाना साधा। गोली उसके पास पत्थर से टकराई। उसका ध्यान भटका और वह नीचे झुक गया।
विधि ने उसी क्षण अपनी स्थिति बदली।
वह सीधी दिशा में आगे बढ़ने के बजाय पत्थरों की आड़ लेते हुए बगल से आगे बढ़ी।
एक अपराधी अचानक उसके सामने आ गया।
उसके हाथ में लोहे की छड़ थी।
उसने पूरी ताकत से वार किया।
विधि ने समय रहते शरीर की दिशा बदली। छड़ उसके कंधे को छूती हुई निकल गई।
उसने अपराधी की कलाई नियंत्रित की।
एक सटीक प्रहार के बाद हथियार उसके हाथ से छूट गया।
विधि ने उसे हथियार से दूर किया और जमीन पर नियंत्रित कर लिया।
“एक अपराधी को बांध दिया है!”
महेश ने आवाज लगाई।
लेकिन उसी समय दूसरा अपराधी इमरान की ओर बढ़ा।
उसके हाथ में चाकू था।
इमरान पीछे हटकर उसकी पहुँच से बाहर हुआ।
अपराधी ने फिर वार किया।
इमरान ने उसकी कलाई रोककर दिशा बदली और महेश ने पहुँचकर उसका हथियार दूर कर दिया।
“दूसरा भी नियंत्रित!”
तभी ऊपर से गोली चली।
प्रकाश के हाथ को छूती हुई गोली निकल गई।
“प्रकाश!”
देव उसकी ओर बढ़ा।
प्रकाश ने दाँत भींचकर कहा
“मैं ठीक हूँ… मोर्चा मत छोड़ो।”
विधि ने ऊपर देखा।
“ऊपर वाला निशानेबाज हमारी स्थिति बदलना चाहता है। देव, उसके रास्ते पर नजर रखो।”
देव ने संकेत समझ लिया।
दो पुलिसकर्मी दूसरी दिशा से आगे बढ़े और प्राचीर के उस हिस्से की घेराबंदी कर दी।
अपराधी पीछे हटने लगा।
“हथियार नीचे रखो! तुम चारों ओर से घिरे हुए हो!”
देव की चेतावनी सुनकर वह ठिठक गया।
लेकिन अगले ही क्षण उसने गोली चला दी।
राघव ने जवाबी कार्रवाई की।
अपराधी के हाथ से हथियार छूट गया।
उसे तत्काल हिरासत में ले लिया गया।
दूसरी ओर दो अपराधियों ने पीछे से निकलने की कोशिश की।
विधि ने उन्हें देख लिया।
“इमरान! बाईं तरफ!”
इमरान ने दिशा बदलकर उनका रास्ता रोका।
एक अपराधी ने लोहे की छड़ से वार किया। इमरान के कंधे पर चोट लगी, लेकिन उसने अपनी स्थिति बनाए रखी।
महेश ने पहुँचकर उस अपराधी का हथियार दूर कर दिया।
कुछ ही क्षणों में दोनों अपराधी नियंत्रण में थे।
तभी शैतान स्वयं आगे आया।
उसके हाथ में चाकू चमक रहा था।
“तुम्हें लगता है कि पुलिस की वर्दी पहन लेने से तुम मुझे हरा दोगी?”
विधि ने कहा
“मैं तुम्हें हराने नहीं आई हूँ। तुम्हें कानून के सामने खड़ा करने आई हूँ।”
शैतान अचानक उसकी ओर झपटा।
चाकू का पहला वार विधि ने शरीर की दिशा बदलकर निष्फल किया।
दूसरा वार आते ही उसने उसकी कलाई नियंत्रित की।
शैतान ने घुटने से प्रहार करने का प्रयास किया।
विधि पीछे हटी।
उसने दूरी बनाई और शैतान के हथियार वाले हाथ को नियंत्रण में लेने का प्रयास किया।
शैतान ने जोर लगाकर खुद को छुड़ा लिया।
विधि ने फिर स्थिति बदली।
दोनों के बीच कुछ क्षण तक तीव्र संघर्ष चलता रहा।
शैतान ने पत्थर उठाकर प्रहार करना चाहा, लेकिन विधि ने उसकी पहुँच रोक दी।
इमरान आगे बढ़ा।
“मैडम!”
“पीछे रहो!”
विधि ने शैतान पर नजरें टिकाए रखीं।
शैतान ने व्यंग्य किया
“तुम मुझे पकड़ नहीं सकतीं।”
विधि ने कहा—l
“मैं तुम्हारे साथ दंगल करने नहीं आई हूँ।”
तभी शैतान ने पीछे हटकर अपनी पिस्तौल निकाली।
विधि ने तुरंत आड़ ली।
शैतान ने गोली चलाई।
गोली पत्थर से टकराई।
राघव ने स्थिति संभाली।
“मैडम, अब वह खुली जगह में है!”
विधि ने संकेत दिया।
पुलिसकर्मियों ने अलग-अलग दिशाओं से घेराबंदी कर ली।
शैतान की स्थिति कमजोर पड़ने लगी।
विधि ने ऊँची आवाज में कहा
“शैतान! तुम्हारा खेल खत्म हो चुका है!”
शैतान ने उसकी ओर देखा।
विधि ने कहा
“अब मैं तुम्हें एक बात बताती हूँ—तुमने जिस परिवार के पाँच लोगों की हत्या की थी, उनके बारे में मुझे सब पता है।”
शैतान का चेहरा अचानक बदल गया।
“क्या?”
विधि ने कहा
“देवेंद्र… सुमन… आदित्य… काव्या… और सरस्वती देवी।”
शैतान कुछ क्षण उसे देखता रहा।
फिर उसकी आँखों में अविश्वास उतर आया।
“यह कैसे संभव है?”
विधि आगे बढ़ी।
“तुम्हारी सबसे बड़ी भूल यह थी कि तुमने समझा कि लोगों को खत्म कर देने से सच भी खत्म हो जाएगा।”
शैतान की आवाज काँप गई
“यह कैसे संभव है, इस घटना से जुड़ा कोई भी व्यक्ति अब इस दुनिया में नहीं है, तुम्हें इसकी जानकारी कैसे है?”
विधि की आँखों में चमक आ गई।
“कंस को भी लगता था कि उसने कृष्ण रूपी उसके काल को मार दिया, लेकिन नियति ने उस रहस्य को भी उजागर किया, तो तू किस गिनती में है?”
शैतान कुछ क्षण निःशब्द रहा।
फिर उसने पीछे देखा।
उसके कई आदमी घायल हो चुके थे।
उसने अपनी पिस्तौल कसकर पकड़ ली।
लेकिन विधि की आँखों में उसे पहली बार ऐसा विश्वास दिखाई दिया जिससे वह विचलित हो उठा।
***********************************
खत्म होती गोलियाँ और खुलता रहस्य
शैतान फिर प्राचीर की आड़ में चला गया।
उसने पिस्तौल उठाई और लगातार गोलियाँ चलाने लगा।
लेकिन कुछ ही क्षण बाद
टक!
गोली नहीं चली।
उसने दोबारा प्रयास किया।
टक!
उसने मैगजीन निकाली।
खाली।
उसने दूसरी पिस्तौल उठाई।
उसमें भी केवल खालीपन था।
“गोली चलाओ!”
उसने अपने साथियों को आदेश दिया।
एक अपराधी ने घबराकर कहा
“साहब… हमारे पास भी गोलियाँ खत्म हो गई हैं।”
शैतान ने चारों ओर देखा।
उसके कई आदमी घायल थे।
कुछ हथियार छोड़ चुके थे।
बाहर पुलिस की घेराबंदी मजबूत हो चुकी थी।
विधि ने ऊँची आवाज में कहा
“शैतान! अब तुम्हारे पास कोई रास्ता नहीं है। हथियार नीचे रखो और आत्मसमर्पण करो!”
शैतान ने खाली पिस्तौल को देखा।
उसकी आँखों में पहली बार पराजय दिखाई दी।
वह धीरे-धीरे प्राचीर के पीछे से बाहर आया।
उसने खाली पिस्तौल जमीन पर फेंक दी और दोनों हाथ ऊपर उठा दिए।
“ठीक है… मैं आत्मसमर्पण करता हूँ।”
महेश और राघव आगे बढ़े।
“हाथ ऊपर रखो!”
शैतान ने हाथ ऊपर किए रखे।
उसकी कलाई में हथकड़ी लगा दी गई।
विधि उसके सामने आकर खड़ी हो गई।
“अब बोलो। पाँच लोगों की हत्या क्यों की?”
शैतान ने कड़वी मुस्कान के साथ कहा
“अगर मेरी गोलियाँ खत्म नहीं हुई होतीं तो शायद मैं यह सच कभी नहीं बताता।”
विधि ने कठोर स्वर में कहा—
“सच तुम्हारी इच्छा से नहीं, कानून की गिरफ्त से बाहर निकलने के लिए बोलना पड़ेगा।”
शैतान कुछ क्षण चुप रहा।
फिर उसने शिव मंदिर की दिशा में देखा।
“इस हत्या के पीछे एक खजाना था।”
महेश ने चौंककर उसकी ओर देखा।
शैतान बोला
“सदियों पहले इस क्षेत्र के एक राजा ने युद्ध के समय अपना राजकोष छिपा दिया था। उसका संकेत इसी पुराने किले और शिव मंदिर से जुड़ा था।”
विधि ने पूछा
“तुम्हें इसकी जानकारी कैसे मिली?”
“पुराने दस्तावेज से।”
“और देवेंद्र?”
“देवेंद्र इतिहास का शोधकर्ता था। उसने भी वही दस्तावेज खोज लिया था।”
“फिर?”
“मैंने उससे उस रहस्य के बारे में पूछा।”
“उसने मना कर दिया।”
“हाँ।”
शैतान ने गहरी साँस ली।
“उसने कहा था कि यदि कोई ऐतिहासिक धरोहर है तो वह उसे सरकार को सौंपेगा।”
विधि की मुट्ठियाँ कस गईं।
“और तुमने उसे मारने का फैसला किया।”
शैतान ने सिर झुका लिया।
“हाँ।”
“उस रात उसके घर में कौन-कौन था?”
“देवेंद्र… उसकी पत्नी सुमन… बेटा आदित्य… बेटी काव्या… और उसकी माँ सरस्वती देवी।”
विधि की आँखें कुछ क्षण के लिए नम हुईं।
शैतान ने कहना जारी रखा
“हमने देवेंद्र से संकेत माँगा। उसने इनकार कर दिया। मैंने अपने आदमियों को आदेश दिया।”
“और पाँचों की हत्या कर दी गई।”
शैतान ने सिर झुका लिया।
“हाँ।”
“फिर भी तुम्हें रहस्य नहीं मिला।”
“नहीं।”
“क्यों?”
“क्योंकि देवेंद्र ने अंतिम संकेत छिपा दिया था।”
“कहाँ?”
शैतान ने मंदिर की ओर देखा।
“शिव मंदिर के पीछे तीसरा टूटा हुआ पत्थर है। उसके नीचे जमीन में जाने वाली पुरानी सीढ़ियाँ हैं।”
विधि ने पूछा
“क्या तुम वहाँ पहुँचे?”
“नहीं। कल रात मुझे पूरा संकेत मिला था। आज मैं खजाना निकालने आया था।”
विधि ने कुछ क्षण उसे देखा।
“पाँच हत्याएँ… सिर्फ एक खजाने के लिए।”
शैतान ने सिर झुका लिया।
“हाँ।”
“और खजाना?”
“अब भी वहीं है।”
विधि ने कहा—
“तुमने धन पाने के लिए पाँच जीवन समाप्त कर दिए, लेकिन अंत में तुम्हारे हाथ क्या आया?”
शैतान चुप रहा।
विधि ने फिर पूछा
“क्या आया?”
शैतान की आवाज टूट गई
“कुछ नहीं।”
*********************************
“रिश्ते का सच और कानून का फैसला”
शैतान को हिरासत में लेकर किले के एक सुरक्षित हिस्से में बैठाया गया।
विधि कुछ दूरी पर खड़ी थी।
उसके चेहरे पर कठोरता थी, लेकिन आँखों के भीतर भावनाओं का तूफान था।
शैतान ने अचानक पूछा
“तुम देवेंद्र को पहले से जानती थीं?”
विधि चुप रही।
शैतान ने फिर पूछा
“तुमने उसका नाम इतनी निश्चितता से कैसे लिया?”
विधि ने धीरे-धीरे उसकी ओर देखा।
“क्योंकि वह मेरे लिए सिर्फ देवेंद्र नहीं था।”
शैतान ने भौंहें सिकोड़ लीं।
विधि की आवाज भर्रा गई
“वह मेरे मामा थे।”
शैतान के चेहरे का रंग उड़ गया।
“क्या?”
“हाँ। मेरी माँ के छोटे भाई।”
कुछ क्षणों तक किले के प्रांगण में पूर्ण मौन छाया रहा।
विधि की आँखों के सामने बचपन की स्मृतियाँ तैरने लगीं।
“जब मैं छोटी थी, मामा मेरी हर तरह से मदद करते थे। कहते थे‘विधि, एक दिन तुम पुलिस अधिकारी बनना। लेकिन याद रखना, वर्दी सिर्फ शक्ति नहीं… बल्कि जिम्मेदारी है।’”
उसने आँखें बंद कर लीं।
“मुझे क्या पता था कि एक दिन उन्हीं की हत्या की जाँच मुझे करनी पड़ेगी।”
शैतान ने धीमे स्वर में कहा
“मुझे नहीं पता था कि देवेंद्र तुम्हारे मामा थे।”
विधि अचानक उसके करीब पहुँची।
“अगर पता होता तो क्या उन्हें छोड़ देते?”
शैतान चुप रहा।
विधि की आवाज में वर्षों का दर्द उतर आया—
“तुमने मेरे मामा को मारा।”
वह एक कदम और आगे बढ़ी।
“मेरी मामी को मारा।”
उसकी आँखों में आँसू भर आए।
“आदित्य और काव्या को मारा।”
फिर उसका स्वर काँप उठा
“और मेरी नानी सरस्वती देवी को भी नहीं छोड़ा।”
शैतान ने सिर झुका लिया।
विधि ने पिस्तौल निकाल ली।
उसने शैतान की ओर हथियार तान दिया।
“आज मैं तुम्हें कानून के हवाले करने से पहले अपने मामा के लिए न्याय दूँगी।”
महेश ने घबराकर कहा
“मैडम…”
विधि की उँगली हथियार पर कस गई।
तभी पीछे से कड़कती आवाज आई
“इंस्पेक्टर विधि!”
वह ठिठक गई।
किले के प्रवेश मार्ग से पुलिस अधीक्षक राणा अपने अतिरिक्त पुलिस बल के साथ आगे बढ़ रहे थे।
राणा तेजी से उसके पास पहुँचे।
“हथियार नीचे करो।”
विधि ने उनकी ओर देखा।
“सर, इस आदमी ने मेरे मामा और उनके पूरे परिवार की हत्या की है।”
“मुझे पता है।”
“तो फिर मुझे क्यों रोक रहे हैं?”
राणा ने शांत लेकिन दृढ़ स्वर में कहा
“क्योंकि तुम्हारे मामा ने तुम्हें पुलिस अधिकारी बनने का सपना दिया था, बदला लेने वाली मुजरिम नहीं।”
विधि की आँखों से आँसू छलक पड़े।
राणा ने आगे कहा
“तुम्हारा दर्द व्यक्तिगत है, लेकिन तुम्हारी वर्दी सार्वजनिक जिम्मेदारी है।”
विधि शैतान की ओर देखती रही।
शैतान ने आँखें बंद कर लीं।
राणा ने कहा
“अगर तुमने इसे गोली मार दी, तो तुम्हारे मामा के हत्यारे का अपराध अदालत तक नहीं पहुँचेगा। तुम खुद कानून तोड़ने वाली बन जाओगी।”
विधि की साँसें भारी हो गईं।
कुछ क्षण बाद उसने धीरे-धीरे पिस्तौल नीचे कर ली।
उसने हथियार सुरक्षित किया।
“इसे गिरफ्तार कीजिए।”
राणा ने सिर हिलाया।
“यही तुम्हारी जीत है।”
पुलिसकर्मी आगे बढ़े और शैतान को विधिवत हिरासत में ले लिया।
उसके सभी साथियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
राणा ने आदेश दिया
“घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता दी जाए। घटनास्थल को सुरक्षित किया जाए। किसी भी वस्तु को बिना विधिवत जाँच के नहीं छुआ जाएगा।”
फिर उन्होंने शिव मंदिर की ओर देखा।
“और जिस खजाने की बात यह कर रहा है, उसकी जाँच संबंधित विशेषज्ञों की उपस्थिति में होगी।”
विधि ने मंदिर की ओर देखा।
सूरज की पहली किरण पहाड़ी के पीछे से निकल रही थी।
रात का अँधेरा धीरे-धीरे समाप्त हो रहा था।
उसे मामा की आवाज फिर सुनाई दी
“विधि, पुलिस की वर्दी सिर्फ शक्ति नहीं देती… जिम्मेदारी भी देती है।”
विधि की आँखों से एक आँसू गाल पर उतर आया।
उसने उसे पोंछा और आकाश की ओर देखकर धीमे स्वर में कहा
“मामा… आज मैंने आपकी बात मान ली।”
पीछे पुलिस वाहनों के इंजन की आवाज गूँजी।
शैतान और उसके साथी पुलिस हिरासत में पहाड़ी से नीचे ले जाए जा रहे थे।
किला फिर से शांत हो गया।
लेकिन विधि की नजर अभी भी शिव मंदिर के पीछे पड़े उस तीसरे टूटे पत्थर पर थी।
शैतान ने कहा था कि उसके नीचे सदियों पुराना रास्ता है।
शायद वहाँ सचमुच कोई खजाना था।
लेकिन विधि के लिए उस सुबह सबसे बड़ा खजाना कोई सोना या रत्न नहीं था।
वह था—अपने मामा की अंतिम सीख को जीवित रखना।
हत्या का रहस्य खुल चुका था।
अपराधी कानून की गिरफ्त में था।
और न्याय की अगली लड़ाई अब अदालत में लड़ी जानी थी।
विधि ने किले से नीचे उतरते हुए एक बार पीछे मुड़कर देखा।
हवा में मंदिर की घंटी फिर बज उठी—
टन्न्न…
मानो सदियों पुराना किला स्वयं गवाही दे रहा हो कि—
सच चाहे कितना भी गहरा दफन हो, एक दिन वह बाहर आकर ही रहता है।
Leave A Comment
You must be logged in to post a comment.
